भारत का स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले कौसानी के टॉप 7 टूरिस्ट प्लेसेज | Kausani Uttarakhand

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प्रकृति के साथ बिताना चाहते हैं सुकून के कुछ पल, तो जरूर जाएं कौसानी 

भागदौड़ वाली जिंदगी में जब कभी वेकेशन पर जाने का प्लान बनता है, तो लगता है कि कहीं ऐसी जगह जाया जाए जहाँ शांति महसूस हो। हम सुकून के कुछ पल अच्छे से बिता सकें। यदि आप भी ऐसी जगह ढूंढ रहें हैं तो आपको कौसानी का ट्रिप प्लान करना चाहिए। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। यहाँ पहुंच कर खुशनुमा और आकर्षक वातावरण से मन आनंदित हो जाता है। Kausani के बारे में सब कुछ जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़े।

कौसानी का इतिहास (History of Kausani Uttarakhand)

उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी एक हिल स्टेशन और गांव है। 1947 ई. में भारत की स्वतंत्रता के बाद 15 सितंबर 1997 तक कौसानी अल्मोड़ा जिले में था। बाद में बागेश्वर जिले को अल्मोड़ा जिले से अलग कर दिया गया था। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के हिमालय और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी जिलों से उत्तराखंड राज्य का निर्माण किया गया था, और कौसानी भी अलग हो गया।

कौसानी का अपना विशेष महत्व है। सन 1929 ई. में महात्मा गांधी यहां आये थे। तो वह अनासक्ति आश्रम में ठहरे थे। कौसानी की खूबसूरती और शांत वातावरण उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने कौसानी को भारत के स्विटजरलैंड का नाम दे दिया। 

कौसानी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स (Some Important Things About Kausani) –

हिल स्टेशन का नामकौसानी
क्षेत्रफल5.2 वर्ग किमी
कुल जनसंख्यातकरीबन 2,408
जनसंख्या का घनत्व460 वर्ग किमी
बोली जाने वाली भाषाएंहिन्दी, कुमाऊँनी
किस लिए फेमस हैप्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए फेमस है।
शहर से निकलने वाली नदीकोसी और गोमती

कौसानी की संस्कृति (Culture of Kausani in Hindi) –

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Culture of Kausani Uttarakhand in Hindi : Image source

कौसानी के ज्यादतर लोग कुमाऊंनी और गढ़वाली समुदायों के सदस्य हैं। यह इन समुदायों के कई त्यौहारों के जरिये अपनी कई पुरानी परंपराओं को बरकरार रखते हैं। कृषि यहाँ की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ की संस्कृति उत्तराखंड की संस्कृति से मेल खाती है।  

कौसानी के त्यौहार (Festivals of Kausani in Hindi) –

फूलदेई छम्मा देई उत्सवउत्सव (Phool Dei, Chamma Dei) :-

फूल देई मार्च के महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़कियां और बच्चे समारोह आयोजित करते हैं। छोटी लड़कियाँ और बच्चे चावल, गुड़, नारियल, हरे पत्ते और फूलों से भरी थालियाँ लेकर मोहल्ले या गाँव के सभी घरों में जाते हैं। वे घर की समृद्धि के लिए शुभकामनाएं देते हैं। वे मौसम के पहले फूल और चावल पड़ोसियों के दरवाजे पर डालते हैं और गीत गाते हैं।

गंगा दशहरा या दशहरा (Ganga Dussehra or Dussehra) :- 

यह त्यौहार हर साल मई-जून के महीने में मनाया जाता है। यह उत्सव दस दिनों तक चलता है। इन दस दिनों में पवित्र नदी गंगा की पूजा की जाती है।

कार्तिक पूर्णिमा (Kartika Purnima) :-

कार्तिक पूर्णिमा हिंदू, जैन और सिख का पवित्र त्योहार है, जो कार्तिक के पंद्रहवें चंद्र दिवस को मनाया जाता है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसे कभी-कभी देव-दिवाली या देव-दीपावली भी कहा जाता है।

नंदा देवी राजजात यात्रा (Nanda Devi Raj Jaat Yatra) :-

तीन सप्ताह तक चलने वाला यह त्यौहार अगस्त के महीने में शुरू होता है और सितंबर के महीने में समाप्त होता है। यह एक स्थानीय अनुष्ठान है, जिसमें देवी पार्वती की पूजा की जाती है और उनके सम्मान में कई लोक नृत्य और गीत गाए जाते हैं।

कौसानी का रहन सहन (Lifestyle of Kausani) –

एक खूबसूरत हिल स्टेशन और गाँव होने के कारण कौसानी का रहन सहन भी बहुत साधारण है। यहाँ के लोग सरलता से अपना जीवन जीते हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहाँ लोग ज्यादा देर तक रात में काम नहीं करते। आपको यहाँ का रहन सहन बहुत पसंद आएगा। जैसा की गावों में देखने को मिलता है। 

कौसानी की पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Costumes of Kausani) –

कुमाऊं की महिलाओं और पुरुषों की कुछ उत्तराखंडी पारंपरिक पोशाकें हैं, जो कुमाऊं की महिलाओं और पुरुषों पर बेहद खूबसूरत लगती हैं। कुमाऊँ की महिलाओं की पारंपरिक पोशाक घाघरा और स्कर्ट है और इसके साथ वे ओरनी लगाती हैं, जिसे यहां ‘पिछौड़ी’ के नाम से जाना जाता है। यहां की ओरनी पूरे देश में प्रसिद्ध है। इनके घाघरे का रंग नीला होता है, जो देखने में बहुत खूबसूरत लगता है। वहीं कुमाऊं की दुल्हनों की पोशाक लहंगा, घाघरा और चोली है।

यहां ज्यादातर महिलाएं धोती भी पहनती हैं। इसे वो सभी शुभ अवसरों, जैसे – शुभ कार्यों, पूजा, शादी, जनेऊ आदि पर पहनती हैं। इसे ‘सुहाग’ का प्रतीक माना जाता है। कुमाऊं और गढ़वाली क्षेत्र के पुरुष धोती-कमीज, धोती-कुर्ता, पायजामा कुर्ता आदि पहनते हैं। कुर्ते के ऊपर वास्कट पहना जाता है और सिर पर सफेद गोल टोपी लगाई जाती है।

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कौसानी का नृत्य (Dance of Kausani) –

कौसानी के नृत्य में उनकी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। यह नृत्य बहुत ही आकर्षक होते हैं, जो कि इस प्रकार हैं – 

  • भोटिया नृत्य (Bhotiya Dance) – भोटिया उत्तराखंड की एक प्राचीन जनजाति है। यह नृत्य उनके द्वारा किया जाता है। इसे मृतकों का नृत्य भी कहा जाता है। क्योंकि इस नृत्य को किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय किया जाता है। 
  • पांडव नृत्य (Pandava Dance) – पांडव नृत्य महाभारत के पांडव भाइयों की कहानी को शुरू से आखरी तक बताता है। इस नृत्य के माध्यम से उनके जीवन के विभिन्न चरणों को ढोल की थाप पर प्रदर्शित किया जाता है। यह हर साल नवंबर से फरवरी के बीच किया जाता है।
  • छोलिया नृत्य (Chholiya Dance) – छोलिया नृत्य एक तरह का तलवार नृत्य है, जो कुमाऊंनी जनजाति की मार्शल आर्ट परंपराओं को दर्शाता है। यह नृत्य शैली एक हजार साल पुरानी है और इसे स्थानीय राजपूत शादियों के दौरान किया जाता है। 
  • मुखौटा नृत्य (Mask Dance) – यह वैशाख महीने में आयोजित मेले में किया जाने वाला एक नृत्य है। इस उत्सव के दौरान लोग हर दिन पिसे हुए चावल को तैयार करते हैं। नृत्य करने वाले पारंपरिक कपड़े और मुखौटे पहनते हैं। यह देवताओं और राक्षसों के रूप में सजते हैं। 
  • झोड़ा नृत्य (Jhoda Dance) – झोड़ा नृत्य वसंत ऋतु का एक उत्सव नृत्य है, जिसे स्थानीय लोग गोल घेरे में घूमकर करते हैं। यह कुमाऊँ हिमालय में अत्यधिक लोकप्रिय नृत्य है। इस नृत्य की खासियत यह है कि इसे ऊंची और नीची दोनों जाति के लोगों को एक साथ करने का मौका मिलता है। 

कौसानी का खानपान (Famous Food of Kausani) –

Famous Food of Kausani
Famous Food of Kausani

यहाँ पर चाय बहुत फेमस है। जब भी आप कौसानी जाएँ तो यहाँ की चाय अपने साथ ले जाना ना भूलें। इसके अलावा आपको यहां का अचार, चोलाई, शर्बत, लाल चावल और जैम बहुत पसंद आएगा, जो कि बहुत फेमस हैं। आप यदि कुंमाउनी खाने का स्‍वाद चखना चाहते हैं तो मडुए का आटा और गौहत की दाल की डिश जरूर खाएं। जलेबी, बाल मिठाई, खुरचन आदि कौसानी के प्रसिद्ध भोजन हैं। आपको यहाँ के खाने का टेस्ट लेने के लिए कई रेस्टोरेंट मिल जायेंगे, जैसे – गार्डन रेस्टोरेंट, वैली रेस्टोरेंट आदि।  

कौसानी घूमने जाने का अच्छा समय (Best Time to Visit Kausani) –

आप कौसानी हिल स्टेशन ऐसे समय जाएं जब वहां का मौसम सबसे अच्छा रहता है। हम आपको बता दें कि कौसानी में सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और अक्टूबर से फरवरी का होता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार इन महीनो में अपना ट्रिप प्लान कर सकते हैं। क्योंकि इस समय इस हिल स्टेशन का वातावरण बहुत खूबसूरत रहता है। आप इस दौरान इस पर्यटक स्थल (Tourist Place) को अच्छी तरह से एक्स्प्लोर कर सकते हैं।

कौसानी में घूमने की जगह (Places to Visit in Kausani) –

1) कौसानी टी एस्टेट (Kausani Tea Estate) –

कौसानी टी एस्टेट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए फेमस है। चाय प्रेमियों को यह जगह बहुत पसंद आती है। इस जगह पर पहुंच कर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप प्रकृति के बहुत करीब हैं। यहां पर आप अलग स्वाद वाली चाय का टेस्ट भी ले सकते हैं। साथ ही उसे खरीद कर घर भी ले जा सकते हैं।   

2) रुद्रधारी जलप्रपात और गुफाएं (Rudradhari Falls and Caves) –

यह कौसानी से 12 किमी की दूरी पर स्थित है। यह जल प्रपात धान के खेतों और हरे देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है, जिस कारण इसकी सुंदरता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ट्रेकिंग करने के लिए भी यह जगह बहुत ही शानदार है। 

जाने का समय – 08:00 AM से 06:00 PM तक

3) बैजनाथ मंदिर (Baijnath Temple) –

बैजनाथ मंदिर कौसानी से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर कौसानी के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में एक है। कत्युरी राजवंश की राजधानी के रूप में भी यह शहर जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण  12 वीं शताब्दी में किया गया था। 

जाने का समय – 08:00 AM से 09:00 AM तक

4) अनासक्ति आश्रम (Anasakti Ashram) –

कौसानी में घूमने के लिए यह भी सबसे अच्छी जगहों में से एक है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यहां अनासक्ति योग पर अपनी यादगार टिप्पणी लिखी थी। उन्होंने यहाँ पर कुछ दिन बिताए थे। इस आश्रम के अंदर एक संग्रहालय भी है। 

जाने का समय – 04:00 PM से  09:00 PM तक

5) लक्ष्मी आश्रम (Lakshmi Ashram) –

यह आश्रम अनासक्ति आश्रम से केवल 1 किमी की दूरी पर स्थित है। इस आश्रम को 1948 में कैथरीन हिलमैन द्वारा बनवाया गया था। इस आश्रम में चारों तरफ शांति का वातावरण रहता है। यह हिमालय की गोद में बसा हुआ है। 

जाने का समय – 09:30 AM से 06:30 PM 

6) पिन्नाथ (Pinnath) –

पिन्नाथ कौसानी से सिर्फ 5 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ पर ट्रेक के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। यहाँ पर लोग मंदिर घूमने के लिए आते हैं। इस मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर राजाओं और पांडवों की छवियां बनी हुयी हैं। यह मंदिर भैरों जी को समर्पित है। 

जाने का समय – 08:00 AM से 06:00 PM तक

7) ग्वालदम (Gwaldam) –

ग्वालदम एक ऐसा स्थान है, जो जंगलों और छोटी छोटी झीलों से भरा हुआ है। यहाँ का नजारा बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है। अभियान रूपकुंड लेक यहां का सबसे Famous ट्रेकिंग ट्रेक है।

जाने का समय – 07:00 AM से 06:00 PM तक 

कौसानी में क्या खरीदें (What to Buy)?

कौसानी से चीजें खरीदना चाहते हैं तो आपको यहाँ पर बहुत सारी अच्छी अच्छी चीजें मिल जाएंगी। जैसे – ऊनी कपड़े, पारंपरिक पोशाक जैसे शॉल, टोपी, घाघरा, पिचोली आदि। इसके अलावा जड़ी-बूटियाँ कौसानी में खरीदने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती हैं। 

कौसानी कैसे जाएं (How to Reach Kausani)?

  1. हवाई जहाज द्वारा (By Air) – कौसानी के लिए सबसे नजदीक का हवाई अड्डा पंतनगर हवाई अड्डा है। यह कौसानी से करीब 162 किलोमीटर दूर है। यहाँ पर पहुंचने के बाद आप टैक्सी से कौसानी आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा देहरादून हवाई अड्डा पर भी उतरा जा सकता है।  
  2. ट्रेन द्वारा (By Train) – आप यदि ट्रेन से यात्रा करना चाहते हैं तो कौसानी पहुंचने के लिए सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन रहेगा। यह कौसानी से लगभग 132 किलोमीटर की दूरी पर है। यह स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली आदि से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। ट्रेन से काठगोदाम पहुंचने के बाद आप बस या टैक्सी से कौसानी आराम से पहुंच सकते हैं।
  3. सड़क द्वारा (By Road) – कौसानी जाने के लिए सड़क मार्ग भी एक अच्छा ऑप्शन है। कौसानी जाने के लिए नियमित बसें चलती रहती हैं। आप यदि दिल्ली से कौसानी जाना चाहते हैं तो आपको ज्यादा बस के ऑप्शन मिल जायेंगे।  

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FAQs –

Q. कौसानी में कौन–कौन से त्यौहार मनाए जाते हैं?

A.कौसानी में नंदा देवी राज जात यात्रा को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा फूलदेई छम्मा देई, गंगा दशहरा या दशहरा जैसे त्यौहार भी भी यहां पर मनाए जाते हैं। 

Q. कौसानी भारत में कहां पर स्थित है?

A. कौसानी हिल स्टेशन भारत में उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित है।

Q. कौसानी क्यों प्रसिद्ध है?

A. कौसानी अपने प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है।  

Q. कौसानी का प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?

A.कौसानी में सोमेश्वर का मंदिर प्रसिद्ध है। 

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस पोस्ट में हमने आपको कौसानी के बारे में सारी जानकारी दी है। इस आर्टिकल में हमने आपको कौसानी के इतिहास, संस्कृति, रहन सहन, पारंपरिक पोशाक, नृत्य, खान पान और वहां के अनोखे त्यौहारों के बारे में बताया है। साथ ही आप कौसानी में कहाँ कहाँ घूमने के लिए जा सकते हैं, कौसानी जाने के लिए कौन कौन से साधन ले सकते हैं, कौसानी में क्या क्या चीजे खरीद सकते हैं इस बारे में भी बताया है।

इसके अलावा किस मौसम में आपको वहां पर जाना चाहिए यह भी बताया है, ताकि आप उसके अनुसार भी अपना Tour Plan कर सकें। आशा है कि आपको यह आर्टिकल काफी Helpful लगा होगा। यदि आपको हमारा आज का आर्टिकल पसंद आया हो तो आप इसे सोशल मिडिया पर भी शेयर करे, Thanks!

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